Computer Operator And Programming Assistant

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आधुनिक कम्प्यूटरों को अस्तित्व में आए हुए मुश्किल से 50 वर्ष ही हुए हैं, लेकिन उनके विकास का इतिहास बहुत पुराना है। कम्प्यूटर का जो रूप हम आजकल देख रहे हैं, वह अचानक ही प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि यह हजारों वर्षों की वैज्ञानिक खोजों और चिन्तन का फल है।

जब से मनुष्य ने गिनना सीखा है, तभी से उसका प्रयास रहा है कि गणना करने में सहायता करने वाले यंत्रो का निर्माण किया जाए। संख्या पद्धति (number system) के प्रयोग तथा भारतीय गणितज्ञों द्वारा 'शून्य' का आविष्कार किए जाने के बाद मानव के लिए संख्याओं का महत्व बहुत बढ़ गया था, इसलिए गणना में सहायक यन्त्रों की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी। इसके परिणामस्वरूप सबसे पहले गिनतारा (abacus) अस्तित्व में आया और बाद में भी कई यंत्रो का निर्माण किया गया। इनका संक्षिप्त परिचय नीचे दिया जा रहा है -


गिनतारा Abacus

यह सबसे पहला और सबसे सरल यन्त्र है, जिसका प्रयोग गणना करने में सहायता के लिए किया गया था। इसका इतिहास 5000 वर्ष से भी ज्यादा पुराना है। ईसा पूर्व 3500 से 3000 में चीन में इसका व्यापक उपयोग होने के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। आश्चर्य की बात है कि गिनतारा आजकल भी अपने प्रारम्भिक रूप में ही रूस, चीन, जापान, पूर्वी एशिया के देशों तथा भारत में भी कुछ स्कूलों में प्रयोग किया जाता है।

गिनतारा लकड़ी का एक आयताकार ढाँचा होता है, जिसमें 9 क्षैतिज या 10 क्षैतिज (horizontal) छड़ें होती हैं। प्रत्येक छड़ में 7 दाने या मनके होते हैं, जिन्हें एक अन्य लम्बवत् छड़ों द्वारा इस प्रकार विभाजित किया जाता है कि एक ओर 5 मनके हों तथा दूसरी ओर दो मनके हों। मनकों को छड़ों पर विभाजक छड़ की ओर अथवा उससे दूर खिसका कर गणनाएँ की जाती है। गिनतारे का नियमित उपयोग करने वाले व्यक्ति आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डेस्क कैलकुलेटर से भी ज्यादा शीघ्र गणनाएँ कर लेते हैं।


एनालॉग मशीन एवं नैपियर बोन्स (Analog Machine and Napier's Bones)

अबेकस के बाद सन् 1617 में स्कॉटलैंड (Scotland) के एक गणितज्ञ जॉन नैपियर (John Napier) ने हड्डियों की छड़ों का प्रयोग कर एक ऐसी मशीन (Device) का निर्माण किया जो गुणा (Multiplication) का कार्य भी कर सकती थी। इसलिए इस मशीन (Device) का नाम नैपियर बोन्स (Napier Bones) रखा गया।


नेपियर बोन्स Napier's Bones


स्कॉटलैण्ड के गणितज्ञ जॉन नेपियर ने सन् 1617 में कुछ ऐसी आयताकार पट्टियों का निर्माण किया था, जिसकी सहायता से गुणा करने की क्रिया अत्यंत शीघ्रता पूर्वक की जा सकती थी। ये पट्टियों जानवरों की हड्डियों से बनी थी, इसलिए इन्हें नेपियर बोन्स कहा गया। चित्र में ये पट्टियाँ दिखाई गई है। ये कुल 10 आयताकार पट्टियाँ होती है। जिन पर क्रमशः 0 से 9 तक के पहाड़े इस प्रकार लिखे होते हैं कि एक पट्टी के दहाई के अंक दूसरी पट्टी के इकाई के अंकों के पास आ जाते हैं। इन पट्टियों का विवरण और उपयोग नेपियर की मृत्यु के बाद ही संसार के सामने आया था।


पास्कल का गणना यन्त्र Pascal's Calculator

गणनाएँ करने वाला पहला वास्तविक यन्त्र महान् फ्रांसीसी गणितज्ञ और दार्शनिक ब्लेज पास्कल ने सन् 1642 में बनाया था। इसे पास्कल का कैलकुलेटर या पास्कल की एडिंग मशीन कहा जाता है। इस मशीन का प्रयोग संख्याओं को जोड़ने और घटाने में किया जाता था। जब पास्कल केवल 18 वर्ष का था, तब अपने टैक्स सुपरिण्टेडेट पिता के लिए उसने यह यन्त्र बनाया था। 

इस यन्त्र में कई दाँतेदार चक्र (पहिए) और डायल होते थे। प्रत्येक चक्र के 10 भाग होते थे, ये आपस में इस प्रकार जुड़े होते थे कि जैसे ही कोई चक्र एक बार पूरा घूम जाता था, तो उससे बाई ओर का चक्र केवल एक भाग (अर्थात् 1/10 चक्र) घूमता था, जिससे हासिल (carry) का प्रभाव उत्पन्न होता था। दो संख्याओं का योग अथवा अन्तर एक संख्या को डायल करके तथा दूसरी संख्या के बराबर चक्रों को क्रमशः घुमाकर ज्ञात किया जाता था।

इस मशीन से पास्कल के पिता को गणनाएँ करने में काफी सहायता मिली। सन् 1645 में इस मशीन को पेटेण्ट कराया गया और व्यापारिक स्तर पर उत्पादित करके बेचा गया, परन्तु उसके बाद पास्कल का ध्यान गणित तथा विज्ञान के दूसरे क्षेत्रों में लगने लगा, इसलिए वह इस मशीन में अधिक सुधार नहीं कर सके। इसे सुधारने का कार्य एक जर्मन गणितज्ञ गोटफ्रेड वॉन लेवनिज ने किया।


बैबेज का डिफरेंस इंजन Difference Engine of Babbage

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के गणित के प्रोफेसर चार्ल्स बैबेज (1792-1871) को आधुनिक कम्प्यूटरों का जनक (पिता) कहा जाता है। गणित के क्षेत्र में उनका पहला महत्त्वपूर्ण योगदान था. एक ऐसा यन्त्र बनाना, जो विभिन्न बीजगणितीय फलनों का मान दशमलब के 20 स्थानों तक शुद्धतापूर्वक ज्ञात कर सकता था। इस मशीन को डिफरेंस इंजन कहा जाता था, क्योंकि यह इस सिद्धान्त के आधार पर बनाया गया था कि किसी बीजगणितीय बहुघातीय फलन (polynomial) मे पास-पास के दो मानो का अन्तर सदा नियत रहता है। यह यन्त्र वास्तव में बहुत उपयोगी था क्योंकि इससे अनेक प्रकार की गणितीय सारणियाँ मिनटों में तैयार हो जाती थी, जिनका उपयोग उन दिनों बीमा, डाक, रेल उत्पादन आदि क्षेत्रों में व्यापक रूप से किया जाता था। आगे चलकर इस मशीन के सुधरे हुए रूप का प्रयोग बीमा कम्पनियों ने जीवन सारणियाँ बनाने में किया था।


बैबेज का एनालिटिकल इंजन Analytical Engirie of Babbage 

अपने डिफरेंस इंजन की सफलता और उपयोगिता से प्रेरित होकर चार्ल्स वैवेज ने एक ऐसे यन्त्र की पूरी रूपरेखा (design) तैयार की जो आजकल के कंप्यूटर से आश्चर्यजनक समानता रखती है। इस मशीन को एनालिटिकल इंजन कहा गया। इस प्रस्तावित मशीन के पाँच प्रमुख भाग थे -

1 इनपुट इकाई आँकड़ों को ग्रहण करने के लिए।

2 स्टोर आंकड़ों तथा निर्देशों को संग्रहित या भण्डारित करने के लिए।

3. मिल अकगणितीय क्रियाएँ करने के लिए।

4 कण्ट्रोल स्टोर तथा मिल संख्याओं और निर्देशों के आवागमन के लिए। 

5 आउटपुट इकाई परिणाम छापने के लिए।

इस मशीन की डिजाइन अपने आप में सम्पूर्ण थी। इसमें न केवल सभी गणितीय क्रियाओं को करने की क्षमता थी बल्कि आँकड़ो को भण्डारित करने का विचार भी इसी में पहली बार प्रस्तुत किया गया था। इतना ही नहीं, इसमें ऐसी क्षमता की कल्पना भी की गई थी कि मशीन दिए हुए निर्देशों के समूह का क्रमानुसार पालन करने में समर्थ होगी। दूसरे शब्दों में प्रोग्राम (prograin) का विचार भी पहली बार चार्ल्स बैबेज ने ही प्रस्तुत किया था। दुर्भाग्य से भारी मात्रा में धन खर्च करने के बाद भी यह मशीन कभी पूरी नहीं हो सकी क्योंकि यह कार्य केवल यान्त्रिक (mechanical) साधनों से करना सम्भव नहीं है और उस समय आजकल जैसी तकनीके उपलब्ध नहीं थी। चार्ल्स वेज का चिन्तन अपने समय से लगभग एक शताब्दी आगे था और भले ही वे अपने प्रयासों में असफल रहे परन्तु उनके कार्य के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। उनकी प्रस्तावित मशीन को आधुनिक कंप्यूटर का आदि पुरुष माना जाता है और चार्ल्स को कम्प्यूटरों का जनक (father of computers) कहा जाता है।


पंचकार्ड उपकरण Punch Card Devices | जैकार्ड की लूम मशीन (Jacquard's Loom Machine )

जोसेफ मेरी जैकार्ड (1752-1834) फ्रांस का एक बुनकर और टैक्सटाइल इंजीनियर था। सन् 1801 में उसने एक ऐसी बुनाई मशीन का निर्माण किया, जिसमें बुनाई की डिजाइन डालने में छिद्र किए हुए कार्डों का उपयोग किया जाता था। ये कार्ड एक अन्तहीन श्रृंखला में एक के बाद एक बार-बार आते रहते थे इसलिए वह कार्डों पर किए हुए छिद्रों के अनुसार बुनाई की डिजाइन 'डालने में समर्थ हो जाता था। दूसरे शब्दों में हम कह सकते है कि बुनाई की डिजाइन का इनपुट उन कार्डो पर था।

जैकार्ड की इस खोज का असली महत्व काफी समय बाद चार्ल्स बैबेज ने पहचाना। वास्तव में उन्होंने अपने एनालिटिकल इंजन की जो डिजाइन तैयार की थी, उसमें इनपुट देने का कार्य छिद्र किए हुए कार्डों द्वारा ही किया जाना था।

चार्ल्स बैबेज के इस विचार को अमेरिका के डा. हर्मन होलेरिथ ने कार्यान्वित किया जो अमेरिका के जनगणना विभाग में कार्यरत थे। डॉ. होलेरिथ ने टेबुलेटिंग मशीन (Tabulating Machine) बनाई जो पूरी दुनिया में लोकप्रिय हुई एवं आगे चलकर होलेरिथ ने अपनी टेबुलेटिंग कम्पनी बनाई जो बाद में IBM (International Business Machine ) के नाम से प्रसिद्ध हुई।


ऑगस्टा एडा (Augusta Ada)


महिला वैज्ञानिक एडा ने बैबेज के सैद्धान्तिक काम पर क्रियाशील एनालिटिकल मशीन बनाकर दुनिया में प्रथम कम्प्यूटर प्रोग्रामर होने का गौरव प्राप्त किया। बाद में वर्तमान कम्प्यूटर पर कार्य करने के लिए विभिन्न कम्प्यूटर भाषाओं का विकास किया गया।

इस महिला वैज्ञानिक को सम्मान प्रदान करने के लि कम्प्यूटर भाषा "एडा" भी विकसित की गई।



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