आधुनिक कम्प्यूटरों को अस्तित्व में आए हुए मुश्किल से 50 वर्ष ही हुए हैं, लेकिन उनके विकास का इतिहास बहुत पुराना है। कम्प्यूटर का जो रूप हम आजकल देख रहे हैं, वह अचानक ही प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि यह हजारों वर्षों की वैज्ञानिक खोजों और चिन्तन का फल है।
जब से मनुष्य ने गिनना सीखा है, तभी से उसका प्रयास रहा है कि गणना करने में सहायता करने वाले यंत्रो का निर्माण किया जाए। संख्या पद्धति (number system) के प्रयोग तथा भारतीय गणितज्ञों द्वारा 'शून्य' का आविष्कार किए जाने के बाद मानव के लिए संख्याओं का महत्व बहुत बढ़ गया था, इसलिए गणना में सहायक यन्त्रों की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी। इसके परिणामस्वरूप सबसे पहले गिनतारा (abacus) अस्तित्व में आया और बाद में भी कई यंत्रो का निर्माण किया गया। इनका संक्षिप्त परिचय नीचे दिया जा रहा है -गिनतारा Abacus
गिनतारा लकड़ी का एक आयताकार ढाँचा होता है, जिसमें 9 क्षैतिज या 10 क्षैतिज (horizontal) छड़ें होती हैं। प्रत्येक छड़ में 7 दाने या मनके होते हैं, जिन्हें एक अन्य लम्बवत् छड़ों द्वारा इस प्रकार विभाजित किया जाता है कि एक ओर 5 मनके हों तथा दूसरी ओर दो मनके हों। मनकों को छड़ों पर विभाजक छड़ की ओर अथवा उससे दूर खिसका कर गणनाएँ की जाती है। गिनतारे का नियमित उपयोग करने वाले व्यक्ति आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डेस्क कैलकुलेटर से भी ज्यादा शीघ्र गणनाएँ कर लेते हैं।
एनालॉग मशीन एवं नैपियर बोन्स (Analog Machine and Napier's Bones)
अबेकस के बाद सन् 1617 में स्कॉटलैंड (Scotland) के एक गणितज्ञ जॉन नैपियर (John Napier) ने हड्डियों की छड़ों का प्रयोग कर एक ऐसी मशीन (Device) का निर्माण किया जो गुणा (Multiplication) का कार्य भी कर सकती थी। इसलिए इस मशीन (Device) का नाम नैपियर बोन्स (Napier Bones) रखा गया।
नेपियर बोन्स Napier's Bones
पास्कल का गणना यन्त्र Pascal's Calculator
इस यन्त्र में कई दाँतेदार चक्र (पहिए) और डायल होते थे। प्रत्येक चक्र के 10 भाग होते थे, ये आपस में इस प्रकार जुड़े होते थे कि जैसे ही कोई चक्र एक बार पूरा घूम जाता था, तो उससे बाई ओर का चक्र केवल एक भाग (अर्थात् 1/10 चक्र) घूमता था, जिससे हासिल (carry) का प्रभाव उत्पन्न होता था। दो संख्याओं का योग अथवा अन्तर एक संख्या को डायल करके तथा दूसरी संख्या के बराबर चक्रों को क्रमशः घुमाकर ज्ञात किया जाता था।
इस मशीन से पास्कल के पिता को गणनाएँ करने में काफी सहायता मिली। सन् 1645 में इस मशीन को पेटेण्ट कराया गया और व्यापारिक स्तर पर उत्पादित करके बेचा गया, परन्तु उसके बाद पास्कल का ध्यान गणित तथा विज्ञान के दूसरे क्षेत्रों में लगने लगा, इसलिए वह इस मशीन में अधिक सुधार नहीं कर सके। इसे सुधारने का कार्य एक जर्मन गणितज्ञ गोटफ्रेड वॉन लेवनिज ने किया।
बैबेज का डिफरेंस इंजन Difference Engine of Babbage
बैबेज का एनालिटिकल इंजन Analytical Engirie of Babbage
अपने डिफरेंस इंजन की सफलता और उपयोगिता से प्रेरित होकर चार्ल्स वैवेज ने एक ऐसे यन्त्र की पूरी रूपरेखा (design) तैयार की जो आजकल के कंप्यूटर से आश्चर्यजनक समानता रखती है। इस मशीन को एनालिटिकल इंजन कहा गया। इस प्रस्तावित मशीन के पाँच प्रमुख भाग थे -
1 इनपुट इकाई आँकड़ों को ग्रहण करने के लिए।
2 स्टोर आंकड़ों तथा निर्देशों को संग्रहित या भण्डारित करने के लिए।
3. मिल अकगणितीय क्रियाएँ करने के लिए।
4 कण्ट्रोल स्टोर तथा मिल संख्याओं और निर्देशों के आवागमन के लिए।
5 आउटपुट इकाई परिणाम छापने के लिए।
पंचकार्ड उपकरण Punch Card Devices | जैकार्ड की लूम मशीन (Jacquard's Loom Machine )
जैकार्ड की इस खोज का असली महत्व काफी समय बाद चार्ल्स बैबेज ने पहचाना। वास्तव में उन्होंने अपने एनालिटिकल इंजन की जो डिजाइन तैयार की थी, उसमें इनपुट देने का कार्य छिद्र किए हुए कार्डों द्वारा ही किया जाना था।
चार्ल्स बैबेज के इस विचार को अमेरिका के डा. हर्मन होलेरिथ ने कार्यान्वित किया जो अमेरिका के जनगणना विभाग में कार्यरत थे। डॉ. होलेरिथ ने टेबुलेटिंग मशीन (Tabulating Machine) बनाई जो पूरी दुनिया में लोकप्रिय हुई एवं आगे चलकर होलेरिथ ने अपनी टेबुलेटिंग कम्पनी बनाई जो बाद में IBM (International Business Machine ) के नाम से प्रसिद्ध हुई।
ऑगस्टा एडा (Augusta Ada)
इस महिला वैज्ञानिक को सम्मान प्रदान करने के लि कम्प्यूटर भाषा "एडा" भी विकसित की गई।